दहेज लोभियों द्वारा नव विवाहिताओं की हत्या की खबरें हर हफ्ते अखबारों में आती है पर किसी को फर्क नही पड़ता.. सबकोई उसे दूसरे की नियति मानकर इग्नोर कर देते है। लेकिन मैं जानना चाहता हूं कि इस सामाजिक बीमारी के कारण क्या है और समाधान क्या है..? सिर्फ सांत्वना प्रकट कर देने से कुछ नही हो सकता.. इसपर गहराई से विचार करना होगा कि लोग ऐसा क्यों करते है..? क्या किसी की बेटी बहन की कीमत लाख रुपये या गाड़ी,फ्रिज से भी कम है जो न मिलने पर उन्हें जान से हाथ धोना पड़ता है..? अगर लोगों को केवल दहेज से ही मतलब है तो फिर शादी विवाह के नाम पर नाटक क्यों..? दुकान क्यों नही लगा लेते अपने बेटों की दहेज के नाम पर.. हर बेटी का बाप अपनी औकात अनुसार खरीद ले जाएगा..! मैं हर बेटी के बाप से यही कहना चाहूंगा कि आप भी आंख मूंदकर दामाद का चयन न करें.. जो परिवार पैसे को ही तरजीह दें उसके यहां शादी करने के बजाय किसी गरीब के घर मे बेटी ब्याह दें.. बेटी के लिए अम्बानी अडानी सरीखा परिवार और अफसर दामाद से पैसे के बल पर बेटी ब्याहने की गलती न करें। बेटियों की शादी के लिए जो आजकल चढ़ा ऊपरी मचा हुआ है समाज में उसी की देन है ऐसी ...