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नवंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जाति और धर्म का भविष्य

हम सब का नित नए लोगों से मिलना होता है रोज ... हर जाति धर्म के लोग मिलते है रोज.. हम किसी से व्यवहार या संबंध किस आधार पर कायम करते है ? अगर कोई मुझसे यह पूछे कि आप कैसे किसी को पसन्द करते है या अच्छा व्यक्ति समझते है तो मेरा जबाब होगा कि मैं उस व्यक्ति के व्यवहार और सोच से अपना संबंध तय करता हूँ। मुझे नही लगता कि जाति, धर्म या अन्य कोई फैक्टर होता है दो व्यक्तियों के व्यवहार के लिए... बेसिकली हमारी जाति मानव की है और यही नेचुरल है, वास्तविक भी और शायद भविष्य भी.. भले ही आज सभ्यताओं, समुदायों का घोर द्वंद देखने को मिल रहा है पर आने वाले एक दो शताब्दी बाद ये चीजें गौण हो जाएंगी। तब जाति नामक चीज की तो बिल्कुल वैल्यू नही रहेगी। धर्म भी अपने सीमित रूप में रहेगा। जाति और धर्म कभी भी मनुष्य का व्यवहार नही तय कर सकते, ऐसा होता तो किसी भी जाति विशेष के लिए बड़ा मुश्किल हो जाता वर्तमान में सर्वाइव कर पाना... जिस तरह से काम धंधे का स्वरूप बदल रहा है और नई नई तकनीकों का जीवन शैली में दखल बढ़ रहा है उससे यही होगा कि आपको कुछेक मौकों और जगहों को छोड़कर कही भी जाति और धर्म का स्वरूप नही दिखेगा। आज वर्...

शिक्षा कैसी होनी चाहिए...

शिक्षा नीति और मेरे विचार... #NEP & My Thoughts.. केवल एजुकेशन ही नही..., बल्कि सही एजुकेशन की जरूरत है बच्चों को... 👉 वर्ग 01 से 05 तक के बच्चों को किताबी ज्ञान से ज्यादा सही आदत और व्यवहार का ज्ञान देना जरूरी है... क्योंकि आदतें ही जीवन का भविष्य तय करती है... तथा व्यवहार से सफलता का प्रतिशत तय होता है। 👉 वर्ग 06 से 08 तक के बच्चों में विभिन्न विषयों की आधारभूत समझ और कम्युनिकेशन स्किल्स को डेवलप करना चाहिए... 👉 वर्ग 09 एवं 10 के बच्चों में देश और दुनियां के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य की समझ विकसित करनी चाहिए तथा आगामी वैश्विक चुनौतियों के प्रति आगाह करते हुए उनकी जिम्मेदारी का भान कराना चाहिए... 👉 वर्ग 11 एवं 12 के बच्चों में उनकी रुचि के हिसाब से उनका करियर चुनने में सहायता करते हुए उन्हें किसी एक विषय में फ़ोकस देना चाहिए... 👉 बारहवीं के बाद बच्चों को प्रोफेशनल लाइफ के लिए करियर क्षेत्र का नॉलेज एवं अनुभव हेतु स्टडी की व्यवस्था होनी चाहिए... 👉 इन सभी स्टेप्स पर बच्चों में नैतिक भावना का विकास होता रहें एवं बच्चे सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से उन्मुख हो... इ...

छपरा यात्रा की कहानी

पिछले एक साल से सारण प्रमंडल यानी छपरा, सिवान, गोपालगंज के दस हजार स्टूडेंट्स से फेसबुक/व्हाट्सएप/टेलीग्राम/कॉल इत्यादि माध्यमों से लगातार बात होती रहती है। स्टूडेंट्स के प्यार, समर्थन और सहयोग की बदौलत मैं हमेशा एनर्जी से भरा रहता हूं उनकी बात सुनने के लिए और अपनी राय देने के लिए... चूंकि मेरा निवास गोपालगंज में है तो गोपालगंज, सिवान के स्टूडेंट्स तो प्रत्यक्ष रूप से भी मिल लेते है पर छपरा के स्टूडेंट्स को दूरी के वजह से दिक्कत होती है... इसलिए कई बार हम ही खुद को छपरा ले आते है। आज 08 नवम्बर को भी इसी क्रम में गोपालगंज स्टेशन से सुबह 6 बजे ट्रेन से निकला और 9 बजे छपरा कचहरी पहुंचा.. सभी स्टूडेंट्स को सूचित कर दिए थे एक दिन पहले ही, अधिकतर स्टूडेंट्स आने में असमर्थता जाहिर करने लगे, चूंकि छुट्टियों में वे गांव निकल गए हैं, साथ मे छठ पर्व भी। एकबारगी तो मन हुआ कि न जाये, पर बात ज़बान की थी, जिसे तोड़ना मैं मुनासिब नही समझता.. सोचा अगर चार स्टूडेंट्स भी आये तो उनको क्या जबाब दूंगा। खैर.. 4 बजे जगकर कचहरी 9 बजे पहुंच गया.. भूख लगी थी.. बाहर होटल में पूछा तो बोला कि 10 बजे खाना मिलेगा.. एक ...