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छपरा यात्रा की कहानी

पिछले एक साल से सारण प्रमंडल यानी छपरा, सिवान, गोपालगंज के दस हजार स्टूडेंट्स से फेसबुक/व्हाट्सएप/टेलीग्राम/कॉल इत्यादि माध्यमों से लगातार बात होती रहती है।

स्टूडेंट्स के प्यार, समर्थन और सहयोग की बदौलत मैं हमेशा एनर्जी से भरा रहता हूं उनकी बात सुनने के लिए और अपनी राय देने के लिए...

चूंकि मेरा निवास गोपालगंज में है तो गोपालगंज, सिवान के स्टूडेंट्स तो प्रत्यक्ष रूप से भी मिल लेते है पर छपरा के स्टूडेंट्स को दूरी के वजह से दिक्कत होती है... इसलिए कई बार हम ही खुद को छपरा ले आते है।

आज 08 नवम्बर को भी इसी क्रम में गोपालगंज स्टेशन से सुबह 6 बजे ट्रेन से निकला और 9 बजे छपरा कचहरी पहुंचा..

सभी स्टूडेंट्स को सूचित कर दिए थे एक दिन पहले ही, अधिकतर स्टूडेंट्स आने में असमर्थता जाहिर करने लगे, चूंकि छुट्टियों में वे गांव निकल गए हैं, साथ मे छठ पर्व भी।

एकबारगी तो मन हुआ कि न जाये, पर बात ज़बान की थी, जिसे तोड़ना मैं मुनासिब नही समझता.. सोचा अगर चार स्टूडेंट्स भी आये तो उनको क्या जबाब दूंगा।

खैर.. 4 बजे जगकर कचहरी 9 बजे पहुंच गया.. भूख लगी थी.. बाहर होटल में पूछा तो बोला कि 10 बजे खाना मिलेगा..

एक स्टूडेंट के यहां खाने का प्लान था, फेल हो गया...

फिर मैं जोगिनियाँ कोठी होते हुए म्युनिसिपल चौक चला गया अच्छे होटल के आस में.. वँहा भी अधिकतर ने मना कर दिया कि लेट से मिलेगा या नही मिलेगा.. स्टाफ नही है।

ठेले का लिट्टी सब्जी खाया और वापस जोगिनियाँ कोठी के पास xiomi मोबाइल स्टोर के पास स्थित SBI ATM के ऊपर एक मित्र के कोचिंग पर,(शील्ड अकेडमी- अमित सर) जहां स्टूडेंट्स से मिलने का कार्यक्रम तय था।

स्टूडेंट्स आये, मिले, बात हुई.. आने का उद्देश्य सफल रहा.. पर कुछ और रोचक बातें हुईं...

रामजयपाल कॉलेज के RAJU SIR जिनसे केवल फेसबुक पर बात हुई थी.. अचानक मेसेज आया कि अमित बाबू हम मार्किट आ रहे है, नम्बर दीजिये भेंट हो जाये।

मन बहुत खुश हुआ.. हिंदी के आदरणीय प्रोफेसर साहब पैदल झूमते हुए चले आ रहे थे। सड़क के किनारे रुककर दो मिनट बात हुई।

कुछ पुराने स्टूडेंट्स डोरीगंज से आये थे, फरहाद से एक मित्र मिले सरफ़राज़ जी.. फॉरेन रिटर्न है पर मातृभूमि पर ही कुछ करने की इच्छा है।

फिर पटना में साथ रहें उस मित्र का फोन आने लगा जिसके साथ हम पटना के स्टूडेंट लाइफ वाले कालावधि में पहली बार सिनेमा देखे थे.. (वैशाली सिनेमा में मालामाल वीकली)। ब्रांच गए, अदब से बैठा, भोजपुरी में हालचाल हुआ... बैंक का एक कप चाय पिये.. पता नही किसके खाते में क्रेडिट होगा। 😂😂😂

यह दोस्त इंडसइंड बैंक (थाना चौक ब्रांच) में कामकाज देखते है सारा.. उनके बैंक के स्टाफ विशाल बाबू वापस कचहरी तक छोड़ने आये.. 2:10 में ट्रेन थी।

लंच करने का वक्त नही मिला तो सोचा कि प्लेटफार्म से कुछ स्नैक्स ले लेता हूं, बैठकर खा लूंगा ट्रेन में... सो bourbon का बिस्किट और बिकानो का भुजिया लिया साथ मे besleri (आजकल ऐसे ही ब्रांडेड कम्पनी का बोतल मिलता है लोकल मार्किट में) का पानी..

मगर ताज्जुब की बात यह है कि तीनों सामान नकली था... जी हां... छपरा कचहरी प्लेटफार्म नम्बर 03 से लिया गया bourbon का बिस्किट, बिकानों का भुजिया एकदम नकली था।

टेस्ट, शेप, और डिजाइन से कन्फर्म हो गया। मैं सोचता हूँ आदमी कुछ ब्रांडेड सामान लेता है कि अच्छा होगा पर यहां तो कहानी ही उल्टा है।

खैर ट्रेन में काफी भीड़ थी.. भांति भांति के लोग देखकर मनोरंजन हो जाता है।

अचानक से रतनसराय स्टेशन पर ट्रेन छोड़ दिया हूँ.. इस समय ही यह पोस्ट लिख रहा हु प्लेटफार्म पर खड़े होकर..

डेस्टिनेशन तो गोपालगंज का था, पर एक प्रिय मित्र रंजीत मांझी जी का सानिध्य का मन किया.. रतन सराय जगह भी देखना चाहता था। फोन कर दिया हूं.. आ रहे हैं रिसीव करने.. मुख्य रूप से अपनी एकमात्र छोटी बहन अमृता के यहां जाने का मन हो रहा था जो रतन सराय से कुछ दूरी पर है।

गांव चला जाता तो बहन से नही मिल पाता.. बहन के बारे में सोचता हूँ कि 20-22 साल हमलोगों के साथ रहने के बाद अचानक से अलग हो जाना.. कभी कभी कितना दुखदाई होता होगा लड़कियों के लिए... समय के अभाव में हम उसको फोन भी नही कर पाते.. उसके घर नही जा पाते.. अपनी फैमिली के किसी मेम्बर का यू अचानक से हट जाना.. क्या नियति है।

खैर कल कुछ देर गोपालगंज में रहने के बाद गांव निकल जाऊंगा... दुनियां के सबसे सुंदर परब छठ में छठी माई का आशीर्वाद लेने.. यह परब मेरे दिल के सबसे करीब है।

यह सुंदर इसलिए है कि यह सामुहिकता का पर्व है.. जिनसे कही नही भेंट होता है और कभी नही होता है.. उनसे छठ में भेंट होता है। दीवाली आप घर में मनाते है, होली घर में मना लेते है।

लेकिन छठ में अकेले होना संभव नही।

मुझे अब गर्व है कि मैं बड़े गर्व से दुनियां के किसी कोने में जाकर कह सकता हूँ कि मैं उस बिहार से हूँ जहां छठ महापर्व होता है।

मुझे लगता है दो तिहाई विश्व मुझे पहचान लेगा और जान लेगा..

छठ माई से आग्रह बा कि दु साल के कोरोना काल में पूरा संसार जवन दुःख उठवले बा, ओकर निदान करीहे..

जय छठी मईया
जय बिहार...

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