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अक्टूबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सबके लिए स्कॉलरशिप

 विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के पास कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए चार छात्रवृत्ति योजनाएं हैं। इन स्कॉलरशिप के लिए आवेदन नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल – Scholarships.gov.in पर जमा कर सकते हैं। 01 👉 स्नातकोत्तर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति छात्रवृत्ति योजना व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए यूजीसी की पीजी छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के उम्मीदवारों को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में उच्च अध्ययन करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। जिन उम्मीदवारों ने एमए, एमएससी, एमकॉम, एमएसडब्ल्यू और मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म प्रोग्राम में प्रवेश लिया है, वे इस स्कॉलरशिप के लिए पात्र नहीं हैं। इन पाठ्यक्रमों को गैर-व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के रूप में माना जाता है। राशि: एमई, एमटेक पाठ्यक्रमों के लिए 7,800 रुपये प्रति माह, अन्य पाठ्यक्रमों के लिए 4,500 रुपये प्रति माह छात्रवृत्ति की संख्या: 1,000 आवेदन करने की अंतिम तिथि: 30 नवंबर, 2021 02 👉 विश्वविद्यालय रैंक धारकों के लिए यूजीसी छा...

वो 200 रुपये...

साल 2013 की बात है, मैं मेकेनिकल से डिप्लोमा कर चुका था और 2011 कि TET में भी 99 नम्बर लाकर क्वालिफाइड हो चुका था। मुझे टीचर के जॉब लगने का इंतजार था, कोचिंग चल रहा था, अचानक एक दिन मां ने कहा कि कबतक ऐसा चलेगा, जाओ जाकर बाहर कमाओ... निठल्ले बैठे हो... बस बात लग गयी। रात को 8 बजे बैग में कपड़े रखा, 200 रुपये थे बस पास में, बड़े भैया को बोला कि स्टेशन छोड़ आओ.. जाने लगा तो माँ, भैया, सबने मना किया कि जाना है तो आराम से जाना। लेकिन मन में हो गया था कि निकल जाना है... थावे स्टेशन से ट्रेन पकड़ कर पटना पहुंच गए। वँहा बोरिंग रोड, पहुंचे सीधे सुबह में.. गोपालगंज के ही शिवजी अंकल के बेटे राहुल भैया तब कृष्णा अपार्टमेंट में PATNA ALLEN CLASSES नाम से NEET और JEE की कोचिंग चला रहे थे, वंही उसी दिन काउंसलर के काम में लग गए... दो दिन राहुल भैया के घर (शिवपुरी इलाका शायद) रहा.. अगले दिन कोचिंग वाले हॉस्टल में शिफ्ट हो गया। फिर बाद में एक बैंकिंग की तैयारी कराने वाले इंस्टिट्यूट (भारती क्लासेस:- AN COLLEGE के ऑपोजिट) में जॉइन किया। रात में इंस्टीट्यूट के ऑफिस में ही सो जाता था, सुबह स्टूडेंट्स के आने स...

लोकतंत्र और बिहार

बिहार में बढ़ते जातिवाद और धार्मिक कट्टरवाद को देखते हुए लग रहा है कि अंग्रेजी राज ही ठीक था। क्योंकि एक शासक के तौर पर अंग्रेजों को जाति से मतलब नही था। चूंकि उनको वोट नही लेना था इसलिए वे वोट के लिए फर्जी योजनाएं और नीतियां नही बनाते थे। इस लोकतंत्र से अच्छा तो उनका तंत्र था, क्योंकि लोकतंत्र में जो समानता का भाव निहित है वह आज खत्म होते जा रहा है। अंग्रेजो ने भारत को समानता के नजदीक पहुंचाने की भरसक कोशिश की। मुझे तो लगता है कि अंग्रेजी शासन से आम जनता को कोई खास दिक्कत नही थी। दिक्कत तो राजे रजवाड़ो और सामंती प्रथा के समर्थकों को था। 200 साल अंग्रेज और रह जाते तो भारत में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक समानता 100% के करीब आ जाती। जातिवाद खत्म ही हो जाता और धार्मिक पहचान धर्म तक सीमित रहती। आज तो लोकतंत्र पर धर्म और जाति हावी है। लोकतंत्र के असली बिंदु को परिधि के बाहर हो गए हैं। दैनिक विचार 14/10/2021

प्रेम का महत्व

प्रेम का अधिक महत्व इसलिए है कि उसमें जुदाई होता है... जुदाई न होता तो प्रेम का कोई महत्व नही रहता। एक लड़की घर जाते समय इतना भाव-विभोर होकर इसलिए रोती है क्योंकि उसको जुदाई मिलती है अपने घर के प्रेम से, मां बाप के प्रेम से, भाई बहन के प्रेम से। उसके आंगन का एक एक कोना उससे जुदा होता है। एक लड़का जब परदेश जाता है रोजी रोटी कमाने तो उसे भी इस प्रेम से वंचित होना पड़ता है। कृष्ण को राधा के प्रेम से वंचित होना पड़ा, मजनूं को लैला के प्रेम से... इसलिए आज इनको याद किया जाता है। जो प्रेम मिल गया उसकी कोई स्मृति नही होती.. यादें तो जुदाई के चलते महत्व पाती है। जब मां बाप मृत्यु को प्राप्त करते है तो उनके प्रेम का पता चलता है। उनके रहते तो लगता है कि मां बाप ही सबसे बड़े बंधन है जीवन के, लेकिन उनसे दूर होते ही अहसास हो जाता है कि असल में मां बाप तो जीवन रूपी नैया के खेवनहार थे। जो अपने रहते उस नैया को भलीभांति पार लगाने का प्रयत्न करते है। प्रेम का महत्व जुदा होने के बाद चलता है। इसलिए रिश्तों की कद्र करें, परिवारिक रिश्तों को मजबूत रखें। जवानी में कदम रख चुके नवयुवकों और नवयुवतियों से ...

मिलन है जुदाई है..

सिवान से बरौनी स्पेशल में बैठे हुए हैं, पूरब की तरफ जा रहे हैं। विंडो सीट के पास बैठे है, विचारों का झोंका आ रहा है रह-रहकर... कुछ बातें घूम रही है मन में.. ये कैसी घड़ी आई है.. मिलन है.. जुदाई है.. जीवन एक ऐसी पहेली है जिसे विद्वानों ने बहुत कोशिश की अपने तर्क, विचार, कविता, कहानी, शायरी से परिभाषित करने की.. पर यह आज भी अबूझ है। जिंदगी के मायने सबके लिए अलग होते है। जीवन में एक ही समय पर सुख और दुःख दोनों मौजूद रहते हैं। एक छात्र जब घर से पढ़ने के लिए बाहर निकलता है तो उसे परिवार से बिछड़ने का दुख होता है तो बाहरी दुनिया, खुले जीवन का सुख भी मिलता है। उसके माता पिता को भी उसके जाने का दुःख होता है पर उनके आंखों में अपने लाडले के भावी सफल भविष्य के लिए सपने होते है और वही सपना उस समय सुख भी देता है। एक लड़की जब शादी के बाद घर से निकलती है तो उसे मां-बाप, भाई-बहन सबसे बिछड़ने का बहुत दुःख होता है पर जीवनसाथी के मिलने.. नए घर की दुलारी होने, मालकिन बनने का सुख भी जुड़ा रहता है... उसे एक नई जगह, नया आकाश मिलता है.. जहां वह अपने तौर तरीकों से सबकुछ मैनेज कर सकती है और अपना मैनेजमेंट का गुण दिखा...