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लोकतंत्र और बिहार

बिहार में बढ़ते जातिवाद और धार्मिक कट्टरवाद को देखते हुए लग रहा है कि अंग्रेजी राज ही ठीक था।

क्योंकि एक शासक के तौर पर अंग्रेजों को जाति से मतलब नही था।

चूंकि उनको वोट नही लेना था इसलिए वे वोट के लिए फर्जी योजनाएं और नीतियां नही बनाते थे।

इस लोकतंत्र से अच्छा तो उनका तंत्र था,

क्योंकि लोकतंत्र में जो समानता का भाव निहित है वह आज खत्म होते जा रहा है।

अंग्रेजो ने भारत को समानता के नजदीक पहुंचाने की भरसक कोशिश की।

मुझे तो लगता है कि अंग्रेजी शासन से आम जनता को कोई खास दिक्कत नही थी।

दिक्कत तो राजे रजवाड़ो और सामंती प्रथा के समर्थकों को था।

200 साल अंग्रेज और रह जाते तो भारत में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक समानता 100% के करीब आ जाती।

जातिवाद खत्म ही हो जाता और धार्मिक पहचान धर्म तक सीमित रहती।

आज तो लोकतंत्र पर धर्म और जाति हावी है।

लोकतंत्र के असली बिंदु को परिधि के बाहर हो गए हैं।

दैनिक विचार
14/10/2021

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