सेब का सबक
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पहली कक्षा को गणित पढ़ा रही टीचर ने एक लड़के से पुछा: अगर मैं तुम्हें एक सेब और एक सेब और एक सेब दूं, तो तुम्हारे पास कितने सेब होंगे? कुछ सेकंड सोचकर लड़के ने आत्मविश्वास से उत्तर दिया: चार! जवाब सुनकर टीचर थोड़ी निराश हुई। उसने सोचा कि शायद लड़के ने प्रश्न ठीक से सुना नहीं। उसने अपना प्रश्न दोहराया: कृपया ध्यान से सुनें और फिर जवाब दें। अगर मैं तुम्हें एक सेब और एक सेब और एक सेब दूं, तो तुम्हारे पास कितने सेब होंगे? लड़के ने फिर से अपनी उँगलियों पर हिसाब लगाया और थोड़ा झिझकते हुए उसने जवाब दिया: चार।
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टीचर फिर से मायूस हो गई। उसे याद आया कि लड़के को स्ट्रॉबेरी बहुत पसंद है। उसने सोचा कि लड़के को सेब पसंद नहीं इसीलिए शायद उसका ध्यान भटक रहा है। ये सोचकर टीचर को लगा कि उसके हाथ बच्चे का राज़ लग गया है। अति उत्साह और चमकती आँखों से उसने लड़के से पूछा: अगर मैं आपको एक स्ट्रॉबेरी और एक स्ट्रॉबेरी और एक स्ट्रॉबेरी दूं, तो आपके पास कितनी स्ट्रॉबेरी होंगी? लड़के ने फिर अपनी उंगलियों पर हिसाब लगाया। लड़के पर तो कोई दबाव नहीं था, लेकिन टीचर ज़रूर दबाव महसूस कर रही थी। लड़के ने झिझकती हुई मुस्कान के साथ उत्तर दिया: तीन। टीचर ख़ुशी से उछल पड़ी।
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उनका तरीका सफल हो गया था। वह खुद को शाबाशी देना चाहती थी। टीचर ने सोचा इससे पहले एक आखिरी बार और पूछ लेती हूँ। उसने बच्चे से फिर पूछा: अब अगर मैं तुम्हें एक सेब और एक सेब और एक और सेब दूं, तो तुम्हारे पास कितने सेब होंगे? इस बार बच्चे ने तुरंत जवाब दिया: चार! जवाब सुनकर टीचर को समझ नहीं आय कि वह क्या करे। उसने थोड़े गुस्से और चिड़चिड़ी आवाज में लड़के से कहा: मुझे समझाओ कैसे?" लड़के ने झिझकते हुए जवाब दिया: तीन सेब आप देंगी और एक सेब पहले से मेरे बैग में रखा है।
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बात का सार ये है कि जब कोई आपको ऐसा उत्तर देता है जो आपकी अपेक्षा से भिन्न होता है, तो जरूरी नहीं कि वे गलत हों। हो सकता है कि उनके बैग में एक सेब रखा हो।
चित्र साभार: इंटरनेट
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