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प्रेम का महत्व

प्रेम का अधिक महत्व इसलिए है कि उसमें जुदाई होता है...

जुदाई न होता तो प्रेम का कोई महत्व नही रहता।

एक लड़की घर जाते समय इतना भाव-विभोर होकर इसलिए रोती है क्योंकि उसको जुदाई मिलती है अपने घर के प्रेम से, मां बाप के प्रेम से, भाई बहन के प्रेम से।

उसके आंगन का एक एक कोना उससे जुदा होता है।

एक लड़का जब परदेश जाता है रोजी रोटी कमाने तो उसे भी इस प्रेम से वंचित होना पड़ता है।

कृष्ण को राधा के प्रेम से वंचित होना पड़ा, मजनूं को लैला के प्रेम से... इसलिए आज इनको याद किया जाता है।

जो प्रेम मिल गया उसकी कोई स्मृति नही होती..

यादें तो जुदाई के चलते महत्व पाती है।

जब मां बाप मृत्यु को प्राप्त करते है तो उनके प्रेम का पता चलता है।

उनके रहते तो लगता है कि मां बाप ही सबसे बड़े बंधन है जीवन के, लेकिन उनसे दूर होते ही अहसास हो जाता है कि असल में मां बाप तो जीवन रूपी नैया के खेवनहार थे।

जो अपने रहते उस नैया को भलीभांति पार लगाने का प्रयत्न करते है।

प्रेम का महत्व जुदा होने के बाद चलता है। इसलिए रिश्तों की कद्र करें, परिवारिक रिश्तों को मजबूत रखें।

जवानी में कदम रख चुके नवयुवकों और नवयुवतियों से आग्रह है कि प्रेम को बस रहने दे, उसे पाने का कोई विशेष यत्न न करें।

क्योंकि प्रेम तभीतक महत्व रखता है जबतक जुदाई है।

प्रेम कोई पाने की वस्तु नही है, यह तो बस महसूस करने वाली भावना है।

अपने आस पास के अपने शुभचिंतकों के प्रेम को महसूस करें.. अपने माँ बाप, भाई बहन के प्रेम को स्वीकार करें।

आप जीवन में कभी कमजोर नही पड़ेंगे।

पटना से गोपालगंज तक का सफ़र पूरा हुआ।

शुभ रात्रि
13/10/2021

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