एक राज्य में सूखा पड़ा, राजा ने राज्य ज्योतिषी को बुलाकर उनसे सूखा खत्म होने का उपाय पूछा।
ज्योतिषी ने बताया कि एक कुआं खुदवाया जाए और राज्य के सभी घरों से एक लोटा दूध उस में डाला जाए, पर ऐसा एक एक करके किया जाए और दूध डालने वाला कुएं में ना झांके तो वर्षा हो जाएगी और सूखा समाप्त हो जाएगा।
राज्य के सभी लोग सूखे से बेहद परेशान थे वे उपाय खोजना चाहते थे प्रजा की जरूरत को देखते हुए राजा ने कुआं खुदवा या और राज्य के सभी नागरिकों को एक लोटा दूध डालने का आदेश दिया
दूसरे दिन जब कुएं में झांका गया तो वह पानी से भरा हुआ था उसमें दूध का कोई नामोनिशान नहीं था
हर किसी ने सोचा की सभी तो दूध डाल ही रहे हैं मैं एक लोटा पानी डाल दु तो क्या फर्क पड़ जाएगा
भले ही यह एक कहानी है लेकिन वर्तमान भारतीयों पर अच्छी तरह से लागू होती है
हर कोई दूध ना डालने के अपने तर्क ढूंढ लेता है और मान लेता है कि मैं तो बहुत अच्छा था उसके सिवा में कर क्या सकता था
अगर मैंने कुछ गलत किया तो मैं मजबूर था अगले ही चौराहे पर वह कहता मिल जाएगा "कहां जा रहा है यह समाज"
"लोगों में नैतिकता बची ही कहा ?"
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