मास्टर ईमानदारी से पढ़ाए,
घंटा भर पहले आए,
घंटा बाद घर जाए,
रक्षाबंधन, होली में भी ड्यूटी बजाए
और अफसर सब घटिया बेंच भेजकर माल छापे..
कहा है वो कड़क ईमानदार अफसर..?
नियम खाली मास्टर पर लागू होगा..?
ईमानदारी खाली मास्टरों के लिए है..?
खेल सामग्री घटिया, साइंस किट घटिया, FLN सामग्री घटिया..
मास्टर के नीचे का मरकज और शिक्षा सेवक मास्टरों की तस्दीक करेगा..?
सारी ईमानदारी मास्टरों के हवाले..?
और लूट चले सब अफसर..
बाकी जानते हो सुबोध... जनता जनार्दन खूब गदगद है, अरे मास्टरों की तो वॉट लग गई है, माहटर लोग सजा गया है।
धुत बुरबक, मास्टर की क्या बिगड़ गई है..?
10 बजे टाइम था, अब नौ बजे जाता है, 4 बजे आना था, 5 बजे के बाद आता है।
और क्या बिगाड़ लोगे तुम मास्टरों का..?
बात ये नही की कौन मास्टर सही तरीके से बहाल हुआ कौन गलत तरीके से,
गेहूं के साथ घुन का तो अनादि काल से रिश्ता रहा है। हर विभाग में है ये रिश्ता, खुद फाटक बाबा के विभाग में भी ऐसे ऑल इंडिया नमूने है।
तो क्या पूरी की पूरी पलटन ही खराब है, अरे नही रे...
लेकिन ये मास्टरों को कमजोर समझ कर पीसने का जो दौर चला है न, तो इस चक्की में राजनीति के चचा न पिसा गए तो फिर कहना..
बाकी बाबा रिटायरमेंट के लिए तारीख पर तारीख के लिए न दौड़े तो गनीमत ही होगा...
मास्टर को कमजोर बुझ कर अनाप शनाप आदेश निकालते हो, संविधान की अवहेलना करके उससे ड्यूटी कराते हो..
काला चश्मा लगाकर सिंघम बने हो, जब मास्टर की अवहेलना कर ही दिए तो काहे को शिक्षा और काहे को दीक्षा...
गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पाय, बलिहारी गुरु आपने दियो गोविंद बताए
सुनो मेंटल, भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी बड़ा माना गया है और यहां अदना मेस का स्टाफ गाली दे देता है..
पियक्कड़ गार्जियन आकर गरिया जाता है,
तुमको तो करना यह चाहिए था की मास्टरों की चरण वंदना कर के उनकी गरिमा को बढ़ाते ताकि नीचे के लोग भी मान सम्मान देते, मास्टर को क्या चाहिए इज्जत के सिवा...?
एक एक मास्टर से पता कीजिए, चाहे वो कोचिंग का हो, स्कूल का हो या ट्यूशन का, पैसा कम मिले उसको शिकायत नहीं होती, पर इज्जत कम मिले, वो बर्दाश्त नहीं करता..
तुम यहां मास्टरों को मदारी बना दिए, दिन भर में तीन तीन आदेश...
अरे इससे अधिक सैलरी लोग दूसरे कामों में पा जाते है, पर कोई शिक्षक के पेशे को चुना है तो उसके अंतर्मन का थोड़ा मान रखो,
नही तो क्यों कोई अपने बच्चे को शिक्षक बनाना चाहेगा...?
बिहार में शिक्षकों की दुर्गति अब अपने चरम सीमा पर है, इसके जिम्मेदार सत्ता और शासन के लोग है।
मास्टर शब्द इसलिए इस्तेमाल जानबूझ कर किया गया है जो इंगित करता है की बिहार में शिक्षक शब्द को अब कितने हल्के परिभाषा में ला दिया गया है।
गुरु से अपने बच्चे को सीख दिलवानी है तो उसका आदर भाव करना ही होगा, नही तो दुनियां की कोई शक्ति नहीं है जो जबरदस्ती किसी से ज्ञान प्राप्त कर लें, निंदा कर के तो बिल्कुल भी नहीं...
खैर आज इतना ही..
शिक्षक अमित गौतम
गोपालगंज, बिहार
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